ताजमहल


दुनिया के सात अजूबों की नई सूची को देखें तो उसमें शामिल ताजमहल की टिकट सबसे सस्ती है। ग्रेट वाल ऑफ चाइना की टिकट सबसे महंगी है। इसके अलावा अन्य स्मारकों की भी टिकट भी ताज से महंगी है। विश्व के अन्य छह अजूबों की टिकट अगर महंगी हैं, तो वहां सुविधाएं भी उतनी ज्यादा हैं। लेकिन ताजमहल पर टिकट अन्य स्मारकों की अपेक्षा सस्ती जरूर है, लेकिन पर्यटकों को सुविधाओं के नाम पर देने के लिए कुछ भी नहीं है।

पिछले साल पुरातत्व विभाग ने ताजमहल की टिकट दरों में बढ़ोत्तरी की थी। तब ताज में एंट्री करने पर विदेशियों के लिए 1100 और उनके मुख्य गुंबद पर जाने पर 1300 की टिकट दर कर दी थी। इसी तरह भारतीय पर्यटकों के प्रवेश करने पर 50 रुपये और मुख्य गुंबद पर जाने के 250 रुपये तय किए गए थे। अब पथकर के रूप में शुल्क वसूलने वाले एडीए ने विदेशियों के शुल्क में 100 रुपये और भारतीय सैलानियों के शुल्क में 30 रुपये की बढ़ोत्तरी कर दी है। यानी प्रवेश करने पर विदेशियों को 1200 रुपये देने होंगे।

ये प्रवेश दर दुनिया के सात अजूबों में सबसे कम है। हालांकि ताज पर पर्यटकों को सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं दिया जाता। विदेशी सैलानियों को जरूर शूकवर दिए जाते हैं। हालांकि पहले उन्हें पानी की बोतल भी मिलती थी, लेकिन अब प्रतिबंध लगने के बाद इसे भी देना बंद कर दिया गया है। पथकर का शुल्क भले ही एडीए लेता हो, लेकिन ताजमहल जाने वाले मार्ग की हालत काफी खराब है। इतना ही नहीं कहीं भी साइनेज बोर्ड तक नहीं लगे हैं। रास्ते में पर्यटन सूचना केंद्र तक नहीं हैं। 


अन्य छह अजूबों की इतनी है टिकट-

ग्रेट वॉल ऑफ चाइना (चीन)

चीन की यह दीवार ग्रेट वॉल ऑफ चाइना सात अजूबों में से एक है। इसकी टिकट 8000 रुपये है। यहां तक जाने के लिए परिवहन व्यवस्था भी इसी टिकट में शामिल है।

ग्रेट वॉल ऑफ चाइना

 पेट्रा (जॉर्डन) 

इस अजूबे को निहारने के लिए 4672 रुपये खर्च करके दिन भर घूमा जा सकता है। जिसमें स्थानीय परिवहन भी शामिल है।

पेट्रा विश्व के नए 7 अजूबों में से एक है। पेट्रा की पहली वास्तविक खुदाई 1929 ईस्वी में की गई थी और जुलाई 2007 में पेट्रा को पेट्रा विश्व के नए 7 अजूबों की लिस्ट में शामिल किया गया। यूनेस्को ने 1985 में इसे विश्व धरोहर में शामिल करने के बाद इसे ‘मनुष्य की पारंपरिक विरासत की सबसे महंगी पारंपरिक संपत्ति’ के रूप में भी परिभाषित किया।

 पेट्रा शहर को कई पहाड़ों की चट्टानों में बसाया गया है। पहाड़ों के भीतर ही घर, मकान और पूजा स्थल बने हुए हैं। यहां के पत्थरों के लाल रंग की वजह से पेट्रा को रोज सिटी के नाम से भी जाना जाता है। पेट्रा लाल चोटियों से घिरा हुआ है जिसकी वजह से इसका रंग लाल है। पेट्रा का नाम एक स्त्री यूनानी शब्द पेट्रोस से लिया गया है जिसका मतलब होता है चट्टानें। पेट्रा आधा निर्मित और चट्टान में खुदा हुआ शहर है।

 पेट्रा शहर को कई पहाड़ों की चट्टानों में बसाया गया है।


काइस्ट द रिडीमर (ब्राजील)

ब्राजील में काइस्ट द रिडीमर भी सात अजूबों की सूची में शामिल है, इसकी टिकट 2947 रुपये की है। वहीं यहां अलग-अलग कैटेगरी की टिकट में पहाड़ी तक ऊपर जाने के लिए ट्रेन का श्रेणी के अनुसार किराया शामिल है। 

हेलिकॉप्टर से देखी गयी प्रतिमा का एक दृश्य


माचू पिच (पेरू)

यहां की टिकट 2816 रुपये की है। यहां होने वाले आयोजनों में शामिल होने के लिए सैलानियों से कोई अलग से खर्च नहीं लिया जाता है। 

माचू-पिच्चू, पेरू


चिचेन इत्जा (मैक्सिको)

यहां की टिकट भी ताजमहल से ज्यादा है। इसकी टिकट की कीमत 1472 रुपये है। साफ-सफाई आर यहां की सड़कें लाजवाब हैं।

चिचेन इट्ज़ा कैनकन के पश्चिम में 200 किलोमीटर की दूरी पर युकाटन राज्य में स्थित है और यह मेक्सिको के सबसे संरक्षित पुरातात्विक स्थलों में से एक है। इट्ज़ा जातीय-वंश समुदाय का नाम है जिसने स्पेनिश विजय से पहले मैक्सिको के उत्तरी प्रायद्वीप पर शासन किया था। चिचेन इट्ज़ा नाम का मतलब होता है कुएं के किनारे। हर साल लगभग 1.2 मिलियन लोग चिचेन इट्ज़ा पर्यटन स्थल की यात्रा करते हैं। चिचेन इट्ज़ा का नाम दुनिया के 7 अजूबों की लिस्ट में आता है।

यह एक पुरातत्व स्थल है जो इतिहास के साथ ही विभिन्न डिजाइनों और शैलियों से समृद्ध है। यह पिरामिड संरचना अपने डिजाइन के साथ-साथ कैलेंडर निर्माण के लिए भी असाधारण है। इसका सबसे बड़ा रहस्य साल में दो बार सांप की आकृति बनाते हुए पिरामिड पर एक छाया का गिरना हर किसी को हैरान कर देता है। चिचेन इट्ज़ा में आकर्षण का केंद्र पिरामिड एल कैस्टिलो है।

चीचेन इट्ज़ा या चिचेन इत्ज़ा


द रोमन कोलोसियम (रोम)

इसकी टिकट 1275 रुपये की है। यहां होने वाले कार्यक्रमों की टिकट भी इसी में शामिल होती है। अलग से कुछ नहीं लिया जाता है।

कोलोसियम, जिसे फ्लावियन एलिप्टिकल एंफ़ीथियेटर भी कहा जाता है, रोम में फ्लैवियन सम्राटों के द्वारा बनाया गया यह विशाल अखाड़ा था। कोलोसियम  का निर्माण वेशपसियन के शासनकाल के दौरान 70 और 72 सी. ई. के बीच शुरू हुआ था। यह नीरा के गोल्डन हाउस के आधार पर, पैटाटिन हिल के पूर्व में स्थित है।

उस महल परिसर के केंद्र में एक कृत्रिम झील थी, जो अब सूख चुकी है और तब वहां कोलोसियम का निर्माण हुआ, एक निर्णय जो उतना ही प्रतीकात्मक था जितना कि यह व्यावहारिक था। वेशपसियन, जिसने सिंहासन हासिल करके अत्याचारी राजा की निजी झील को सार्वजनिक अखाड़े में बदल दिया, जो कि हजारों रोमियों की मेजबानी कर सके।

कोलोसियम रोम