भारतीय नौसेना का वह जहाज था आईएनएस विक्रांत जिससे पाकिस्तान इस कद्र खौफ खाता था कि किसी भी कीमत पर उसको तबाह करना चाहता था। 

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काफी समृद्ध और गौरवशाली रहा है भारत का समुद्री इतिहास। नौसेना के पोतों का अहम योगदान रहा है देश के समुद्री और सैन्य इतिहास का गौरव बढ़ाने में। जब भी भारतीय नौसेना के जहाजों के योगदान को याद किया जाता है तो उनमें एक नाम आईएनएस (इंडियन नेवल शिप) विक्रांत का नाम शीर्ष पर आता है। साल 1961 में इस विमानवाहक जहाज को आईएनएस विजय लक्ष्मी पंडित के नाम से सेवा मे शामिल किया गया। इसका संस्कृत मे मतलब अपराजेय और साहसी होता है बाद मे इसका नाम विक्रांत किया गया।

इतिहास

शुरूआत मे इसका नाम एचएमएस (हर मजेस्टी शिप) हर्कुलस था। इस जहाज का निर्माण ब्रिटेन के विकर्स-आर्मस्ट्रांग शिपयार्ड पर हुआ था। यह ब्रिटेन के मजेस्टिक क्लास का पोत था जिसे साल 1945 में ब्रिटिश नौसेना की सेवा में शामिल किया गया। जहाज को सक्रिय सैन्य अभियान में तैनात किया जाता, उससे पहले ही द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त हो गया। उसके बाद नौसेना की सक्रिय ड्यूटी से इस जहाज को हटा दिया गया और फिर शाल 1957 में भारतीय नौसेना को बेच दिया गया। आयरिश हारलैंड और वोल्फ शिपयार्ड कम्पनी ने भारतीय नौसेना की जरूरत के अनुरूप उसका जीर्णोद्धार किया। 4 मार्च, 1961 आईएनएस भारतीय नौसेना मे शामिल किया गया था।

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युद्ध में भूमिका 

1971 में भारत-पाक युद्ध मे इस विमान वाहक पोत के कारण पाकिस्तान के पसीने छूट गऐ थें। विक्रांत के करण समुद्र मे भारत का दबदबा बढ़ गया था। हलांकि इस पोत के एक बॉयलर्स मे कुछ समस्या थी और सीमित रफ्तार मे इसको काम करना पड़ता था, आईएनएस के नाम मात्र से ही पाकिस्तान के मन मे इतना खौफ बस चुका था कि वह किसी भी कीमत में इस विमान वाहक पोत को नष्ट करना चाहता था। 1971 के युद्ध के दौरान पाक की ओर से पनडुब्बी पीएनएस गाजी को इस्तेमाल करने का फैसला किया गया था। आईएनएस विक्रांत को यदि क्षति पहुंचती तो पाक सेना के मन से भारतीय सेना के इस विमान वाहक पोत का खौफ खत्म हो जाता। भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान को चकमा दिया और आईएनएस राजपूत को आईएनएस विक्रांत बनाकर पेश किया।पाकिस्तानी पनडुब्बी गाजी ने जब आईएनएस राजपूत पर विक्रांत समझकर हमला किया तो आईएनएस राजपूत ने गाजी को तबाह कर दिया था।

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आलोचना

उस समय के रूसी राजनयिकों ने ब्रिटिश युद्धपोत को भारतीय नौसेना में शामिल होने पर सवाल उठाए। भारतीय नौसेना मे आईएनएस विक्रांत के शामिल होने को कुछ पक्षों के द्वारा सही नजरों से नहीं देखा गया। वहीं इस जहाज के प्रदर्शन को लेकर भारतीय सेना के कुछ अधिकारी आशंकित थे।

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जहाज की खासियत

आईएनएस विक्रांत 25 नॉट्स यानी 25 समुद्री मील प्रति घंटा की रफ्तार से चलता था। बाद में तकनीकी समस्याओं के कारण इसकी रफ्तार करीब 12 नॉट्स या 12 समुद्री मील प्रति घंटा हो गई इस पोत को दो महावीर चक्र और 12 वीर चक्र मिल चुके है। इसकी लंबाई 192 मीटर, बीम 24.4 मीटर और ड्राफ्ट 7.3 मीटर था।

आईएनएस विक्रांत के सेवामुक्ति

सेवामुक्ति

युद्ध के बाद आईएनएस विक्रांत के इंजन, बॉयलर और अन्य तकनीकी उपकरणों की मरम्मत करके जहाज का जीर्णोद्धार किया गया।
1971 में इसे सेवामुक्त कर दिया गया क्यूंकि कुछ सालों तक सेवा में रहने के बाद इसका प्रदर्शन संतोषजनक नही रहा। सेवामुक्ति के बाद भी विक्रांत आकर्षक का केंद्र बना रहा है। सभी देशों से लोग इसे देखने के लिऐ आते थे। इसकी लोकप्रियता को देखते हुए भारत सरकार ने इसे तैरते हुऐ संग्रहालय में बदलने का फैसला किया । मौजूदा समय में यह जहाज मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया के पास है। अब इसका नाम बदलकर आईएमएस विक्रांत कर दिया गया है। आईएमएस का पूरा नाम इंडियन म्यूजियम शिप है।